# लखनऊ पुस्तक मेले में युवा लेखक अभिलाष दत्ता की पांचवीं पुस्तक ‘यादों के एल्बम से…’ का लोकार्पण

*मधुबनी के मानापट्टी गांव के रहने वाले लेखक ने संस्मरणों में समेटीं बचपन से युवावस्था तक की रोचक और भावुक यादें**

# लखनऊ पुस्तक मेले में युवा लेखक अभिलाष दत्ता की पांचवीं पुस्तक ‘यादों के एल्बम से…’ का लोकार्पण

**मधुबनी के मानापट्टी गांव के रहने वाले लेखक ने संस्मरणों में समेटीं बचपन से युवावस्था तक की रोचक और भावुक यादें**

**रिपोर्ट : सुभाष सिंह यादव**


**जयनगर, 9 अक्टूबर।** मधुबनी जिले के जयनगर अनुमंडल अंतर्गत बासोपट्टी प्रखंड के मानापट्टी गांव के युवा लेखक अभिलाष दत्ता की पांचवीं पुस्तक ‘यादों के एल्बम से…’ का लोकार्पण उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में किया गया। पिछले शनिवार को हुए इस लोकार्पण से साहित्य जगत में उनकी रचनात्मक यात्रा को एक और उपलब्धि मिली है।

संस्मरण विधा पर आधारित इस पुस्तक में लेखक ने अपने जीवन की 15 हास्य-व्यंग्यपूर्ण घटनाओं को संकलित किया है। पुस्तक में बचपन से युवावस्था तक की यादों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। इनमें हंसी-मजाक, शरारतें, रिश्तों की आत्मीयता और जीवन के भावुक क्षण शामिल हैं।

लेखक अभिलाष दत्ता के अनुसार, रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं को अपने अनुभव और हास्यबोध के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है कि पाठक उनमें अपने जीवन की झलक देख सकें। पुस्तक केवल व्यक्तिगत स्मृतियों का संग्रह नहीं है, बल्कि बीते समय, सामाजिक परिवेश और रिश्तों की गर्माहट को भी सामने लाती है।

**फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई हैं चार पुस्तकें**

फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन के मुख्य संपादक मिथिलेश गुप्ता ने बताया कि अभिलाष दत्ता की अब तक चार पुस्तकें उनके प्रकाशन से प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि लेखक की अगली पुस्तक इसी वर्ष आयोजित होने वाले पटना पुस्तक मेला-2026 में पाठकों के सामने आने वाली है।

पुस्तक के लोकार्पण समारोह में पटना के वरिष्ठ लेखक कमल किशोर वर्मा, दिल्ली के वरिष्ठ लेखक अतुल, राम पुजारी, नीरा, समीर घोषाल, मोहित शर्मा, हीरालाल, योगेश कुमार और प्रियांशी कुमारी सहित कई साहित्यप्रेमी एवं लेखक उपस्थित रहे।

मधुबनी जिले के एक गांव से निकलकर राष्ट्रीय पुस्तक मेले में अपनी पुस्तक का लोकार्पण कराने वाले अभिलाष दत्ता की यह उपलब्धि स्थानीय साहित्यिक जगत के लिए भी उत्साहजनक है। उनकी नई पुस्तक से पाठकों को जीवन की सहज घटनाओं, मानवीय संबंधों और बीते दिनों की यादों को एक नए अंदाज में पढ़ने का अवसर मिलेगा।

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