सूरत से मजदूरों का पलायन फैक्ट्री मालिकों के उत्पीड़न का नतीजा: कुणाल
चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग, बिहार सरकार से प्रवासी मजदूरों के हित में तत्काल पहल करने की अपील
सूरत से मजदूरों का पलायन फैक्ट्री मालिकों के उत्पीड़न का नतीजा: कुणाल
चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग, बिहार सरकार से प्रवासी मजदूरों के हित में तत्काल पहल करने की अपील

जे टी न्यूज
पटना : सूरत की टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों के बड़ी संख्या में अपने घर लौटने की खबरों पर भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छुट्टी नहीं मिलने और 12 घंटे तक काम कराने जैसी परिस्थितियों से परेशान होकर मजदूर पलायन कर रहे हैं। उनके अनुसार, मजदूरों की यह वापसी अब ‘गांव चलो आंदोलन’ का रूप लेती जा रही है। रेलवे स्टेशनों पर भीड़ बढ़ रही है और लौटने वालों में बिहार के मजदूरों की बड़ी संख्या है।
कुणाल ने कहा कि फैक्ट्री मालिकों के कथित उत्पीड़न से तंग आकर मजदूरों का घर लौटना गंभीर मामला है। यह देश में श्रमिकों की बदहाल स्थिति, उनके अधिकारों पर बढ़ते हमलों और रोजगार के संकट को उजागर करता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मजदूरों के उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए, श्रम अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषी फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
उन्होंने कहा कि मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां, उचित मजदूरी और सुरक्षा मिलने के बजाय शोषण तथा असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग
भाकपा-माले के राज्य सचिव ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चारों लेबर कोड से पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों को श्रमिकों के अधिकारों पर हमला करने की अधिक छूट मिली है। उन्होंने कहा कि इन श्रम संहिताओं से मजदूरों के अधिकारों और संगठित होकर अपने हितों की रक्षा करने की क्षमता कमजोर हो रही है। पार्टी की मांग है कि चारों लेबर कोड वापस लिए जाएं और मजदूरों के संघर्षों से हासिल अधिकारों की रक्षा की जाए।
बिहार सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
कुणाल ने बिहार सरकार से सूरत से लौट रहे मजदूरों की स्थिति का पता लगाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को लौटने वाले श्रमिकों के रोजगार, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार के मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर होते हैं, जहां कई बार उन्हें अपमान, शोषण और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। यह राज्य में पर्याप्त रोजगार के अवसरों की कमी को भी सामने लाता है।
कुणाल ने बिहार सरकार से कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए ठोस योजना बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
