विजयादशमी का संदेश: दुनिया में शांति, देश में सद्भाव और जीवन में सत्य की विजय हो
विजयादशमी का संदेश: दुनिया में शांति, देश में सद्भाव और जीवन में सत्य की विजय हो
रावण का पुतला जलाने के साथ मन के अहंकार, नफरत और हिंसा को भी मिटाएं; यही पर्व की सच्ची सार्थकता है : बिमल सर्राफ
जे टी न्यूज , रक्सौल, पूर्वी चंपारण:
विजयादशमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और अच्छाई की जीत का संदेश है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में विजय सत्य और धर्म की ही होती है। भगवान श्रीराम की रावण पर विजय केवल एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है।
आज जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, हिंसा, आतंक, आपसी तनाव और नफरत का माहौल है, तब विजयादशमी का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कहीं निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, कहीं बच्चे भय और भूख के बीच जीवन बिता रहे हैं, तो कहीं परिवार अपने घरों से दूर होने को मजबूर हैं। ऐसी परिस्थितियों में विश्व को हथियारों की होड़ से अधिक शांति, संवाद, करुणा और मानवता की जरूरत है।
विजयादशमी हमें सिखाती है कि असली विजय किसी को हराने में नहीं, बल्कि दिलों को जीतने में है। यदि शक्तिशाली देश अपने मतभेद बातचीत से सुलझाएं, पड़ोसी देश आपसी विश्वास बढ़ाएं और समाज धर्म, जाति तथा भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता को महत्व दे, तो दुनिया अधिक सुरक्षित और सुंदर बन सकती है।
भारत की धरती ने सदियों से शांति, सहिष्णुता और आपसी सम्मान का संदेश दिया है। हमारा देश अनेक धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का संगम है। यही विविधता हमारी शक्ति है। आज जरूरत है कि हम इस एकता को और मजबूत करें, सामाजिक सद्भाव बनाए रखें और राजनीतिक या वैचारिक मतभेदों को आपसी दुश्मनी में न बदलने दें।
विजयादशमी का पर्व हमें अपने भीतर झांकने का अवसर भी देता है। रावण के दस सिर केवल एक पौराणिक प्रतीक नहीं, बल्कि अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, छल, अन्याय और दूसरी बुराइयों से भी जोड़कर देखे जा सकते हैं। यदि हम हर वर्ष रावण का पुतला जलाते हैं, लेकिन अपने भीतर की बुराइयों को जीवित रखते हैं, तो पर्व का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

आज समाज को ऐसे लोगों की जरूरत है, जो नफरत के स्थान पर प्रेम, झूठ के स्थान पर सत्य, स्वार्थ के स्थान पर सेवा और अन्याय के स्थान पर न्याय को चुनें। परिवारों में सम्मान, समाज में सहयोग और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी ही एक बेहतर राष्ट्र की नींव हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार देना, महिलाओं का सम्मान करना, कमजोर लोगों की सहायता करना और प्रकृति की रक्षा करना भी इसी भावना के महत्वपूर्ण रूप हैं।
इस विजयादशमी पर हमारी मंगलकामना है कि भारत शांति, एकता, समृद्धि और विकास के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़े। हर नागरिक को सम्मान मिले, हर बच्चे को शिक्षा, हर जरूरतमंद को सहारा और हर परिवार को सुख-शांति प्राप्त हो। देश में प्रेम और भाईचारा मजबूत हो तथा दुनिया के सभी देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़े।
हमारी प्रार्थना है कि युद्ध से जूझ रहे क्षेत्रों में शांति लौटे, निर्दोष लोगों का जीवन सुरक्षित हो, भूख और गरीबी कम हो तथा मानवता की सेवा करने वालों को शक्ति मिले। किसी भी देश की प्रगति तभी सार्थक है, जब उसके विकास के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जीवित रहें।
आइए, इस विजयादशमी पर केवल रावण का पुतला नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, नफरत और अन्याय को भी जलाने का संकल्प लें।
यही पर्व की सच्ची पूजा है, यही भगवान श्रीराम के आदर्शों का सम्मान है और यही एक शांतिपूर्ण विश्व तथा सशक्त भारत के निर्माण का मार्ग है।
आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
प्रभु श्रीराम सबके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करें। भारत सहित पूरे विश्व में सत्य, सद्भाव और मानवता की विजय हो।

