पश्चिम चंपारण संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक प्रभुराज नारायण राव ने बताया कि 23 अक्टूबर को बेतिया सहित पूरे बिहार में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन तथा पुतला जलाया जाएगा

23 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी के लिए किसानों का मार्च

पश्चिम चंपारण संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक प्रभुराज नारायण राव ने बताया कि 23 अक्टूबर को बेतिया सहित पूरे बिहार में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन तथा पुतला जलाया जाएगा

23 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी के लिए किसानों का मार्च

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल पुनः बहाल करने

अवैध एसआईआर रद्द करने!

ज्ञानेश कुमार को हटाओ और उन पर मुकदमा चलाओ!

हमारी मतदाता सूची को नए सिरे से दुरुस्त करो!

जे टी न्यूज, बेतिया: सभी नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल होने तक एकजुट संघर्ष की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय निर्वाचन आयोग का दुरुपयोग करके एसआईआर के जरिए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार छीन लिए हैं। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत प्रपत्र-6 जैसे वैधानिक प्रपत्रों में संशोधन संसद के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। ऐसा किए बिना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रपत्रों में बदलाव करके वास्तविक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए, ताकि भाजपा को सत्ता में बनाए रखा जा सके। यह संविधान का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया है कि उसने निर्वाचन आयोग को प्रपत्र-6 में बदलाव करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के पास स्वयं भी ऐसा करने का अधिकार नहीं है। ज्ञानेश कुमार ने संविधान के प्रति अपनी शपथ का उल्लंघन किया है और उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री स्वयं इस अपराधी को संरक्षण दे रहे हैं। *नियमावली में औपचारिक बदलाव करने का एकमात्र अधिकार संसद के पास है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संसद द्वारा महाभियोग के जरिए पद से हटाए बिना प्रधानमंत्री इस गंभीर संवैधानिक गतिरोध से बाहर नहीं निकल सकते।*

*लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए जनता का मार्च — जनता–एसआईआर के खिलाफ द्वारा आहूत पहला जमीनी संघर्ष*— देश की जनता के उस एकजुट संघर्ष की शुरुआत है, जो तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा नहीं चलाया जाता, अवैध एसआईआर रद्द नहीं किया जाता, भारत के प्रत्येक वास्तविक नागरिक का मतदान का अधिकार बहाल नहीं किया जाता और निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 में संशोधन नहीं किया जाता। हम अपना लोकतंत्र वापस हासिल करेंगे!

*एसआईआर को वापस लेने के लिए 23 अक्टूबर, 26 को लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा तथा ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी के लिए पश्चिम चम्पारण में ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया जायेगा* संयुक्त किसान मोर्चा तथा मजदूर संगठन इस शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए मतदाता सूची से 13 करोड़ से ज्यादा लोगों का नाम काट कर भाजपा को जिताने का काम किया है।उसे बर्खास्त करने,शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमले और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के दोषी दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई के लिए, शांतिपूर्ण तिरंगा लहरा दो प्रदर्शन पर दमनात्मक कार्रवाई एवं कनॉट प्लेस को पुलिस छावनी में तब्दील करना मौलिक अधिकारों को छीनना है और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार को पुलिस बल से दबाने का अधिकार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का संविधान नहीं देता। इसके बावजूद, सर्वोच्च न्यायालय सहित न्यायपालिका द्वारा कानून के इस खुले उल्लंघन पर चुप्पी साधे रखना गंभीर चिंता का विषय है। मोदी–शाह शासन के तहत थोपी जा रही इस अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति को देश के किसान,मजदूर,छात्र , नौजवान तथा महिलाएं कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

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