भगत सिंह की 118 वीं जयंती बेतिया में मनायी गई
भगत सिंह की 118 वीं जयंती बेतिया में मनायी गई

जे टी न्यूज, बेतिया: शहीद ए आज़म भगत सिंह स्वतंत्रता आंदोलन के प्रखर क्रांतिकारी थे।उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा ग्राम में हुआ था।1919 में जलियांवाला बाग नृशंस नरसंहार को 12 साल की उम्र में ही देखा था।तब से ही बदला लेने को ठान लिया था।लाहौर डी ए वी स्कूल में शिक्षा लेने के दौरान राजगुरु,सुखदेव से दोस्ती हो गई।वे सोवियत क्रांति से प्रभावित होकर भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त होने के बाद देश में समाजवादी व्यवस्था को कायम करना चाहते थे।
उन्होंने 1926 में भारत नौजवान सभा की स्थापना की। उसमें नौजवानों को जोड़ते गए।इसी क्रम में उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद से हुई।आजाद ने हिंदुस्तान प्रजातांत्रिक सेना नाम की पार्टी बनायी थी।जिसके नेतृत्व में वे अंग्रेजों से लड़ रहे थे।दोनों दलों की सहमति के बाद समाजवाद जोड़कर हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातांत्रिक सेना दल बना और भारत नौजवान सभा को नौजवानों का संघ घोषित किया गया।
पंजाब के गदर पार्टी के नेता लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने का भगत सिंह ने ठान लिया।पार्टी के नायक चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व में पुलिस ऑफिसर सांडर्स को मार दिया गया।
भगत सिंह 8 अप्रैल 1928 को बटुकेश्वर दत्त के साथ दिल्ली एसेंबली में बम फेंके।वह बम बहरों को सुनाने के लिए धमाका मात्र था।बन फेंक कर इंकलाब जिंदाबाद,साम्राज्यवाद मुरादाबाद,समाजवाद जिंदाबाद के नारे लगाते हुए गिरफ्तारी दे दिये।उनकी गिरफ्तारी के बाद देश के नौजवानों में ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने का जज्बा पैदा होने लगा।अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा चारों तरफ गूंजने लगा।अंग्रेज भयाक्रांत हो गए।भगत सिंह की फांसी का समय 24 मार्च 1931 को निर्धारित था।लेकिन भयभीत होकर भगत सिंह की फांसी राजगुरु, सुकदेव के साथ 23 मार्च की संध्या में ही दे दी गई।

रिक्शा मजदूर सभा भवन बेतिया में शहीद ए आज़म भगत सिंह के जयंती पर आयोजित सभा को माकपा के जिला सचिव चाँदसी प्रसाद यादव,शंकर कुमार राव,प्रभुनाथ गुप्ता ,प्रकाश कुमार वर्मा, रामा यादव,नीरज बरनवाल,मो. हनीफ, वी के नरुला,प्रेम प्रसाद,उमाकांत कुमार,मो. सहीम,मुकेश कुमार आदि ने अपने विचार रखे।

