वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन एवं शोधचक्र पर ऑनलाइन जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित महाविद्यालयों के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से लिया भाग शोधगंगा पर सात हजार से अधिक शोध प्रबंध अपलोड होने की हुई सराहना
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन एवं शोधचक्र पर ऑनलाइन जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
महाविद्यालयों के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से लिया भाग
शोधगंगा पर सात हजार से अधिक शोध प्रबंध अपलोड होने की हुई सराहना
जे टी न्यूज,
दरभंगा: बिहार लोक भवन, पटना के तत्वावधान तथा इंफ्लिबनेट केंद्र, गांधीनगर के सहयोग से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा द्वारा सोमवार को शोधगंगा, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन एवं शोधचक्र विषय पर ऑनलाइन जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 1 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी स्नातकोत्तर विभागों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम में विभिन्न डिजिटल शैक्षणिक एवं शोध संसाधनों की उपयोगिता, उनकी कार्यप्रणाली तथा शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के अकादमिक समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध डिजिटल शोध संसाधनों से परिचित कराना तथा उनके प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना था।
शोधगंगा पर सात हजार से अधिक शोध प्रबंध अपलोड
शोधगंगा के संबंध में इंफ्लिबनेट के वैज्ञानिक मनोज कुमार ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोध प्रबंधों के डिजिटल संग्रह, उनकी ऑनलाइन उपलब्धता तथा शोध कार्यों में इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय पहला विश्वविद्यालय है, जहां शोध प्रबंधों को लगातार समय पर शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के सात हजार से अधिक शोध प्रबंध इस पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तक पहुंच
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन की सेवाओं एवं उपयोगिता के संबंध में इंफ्लिबनेट के विशेषज्ञ ऋषभ कुमार और ज्योति कुमारी ने विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तथा अकादमिक प्रकाशनों तक पहुंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को इंटरनेट प्रोटोकॉल आधारित तथा दूरस्थ प्रवेश सुविधा के माध्यम से इन सेवाओं का लाभ मिल रहा है। विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय में इस सुविधा की उपलब्धता की सराहना की।
शोधचक्र पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अपील
इसी क्रम में इंफ्लिबनेट की विशेषज्ञ डॉ. सना ने शोधचक्र पोर्टल की कार्यप्रणाली, विभिन्न सुविधाओं तथा शोधार्थियों और शोध-निर्देशकों के लिए इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने शोधार्थियों से पोर्टल पर पंजीकरण कराने और अपनी आवश्यक जानकारी दर्ज कर उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान शोधगंगा, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन एवं शोधचक्र से संबंधित प्रतिभागियों ने कई जिज्ञासाएं और प्रश्न प्रस्तुत किए। इंफ्लिबनेट केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक कुमार ने सभी प्रश्नों का क्रमवार एवं विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए संबंधित पोर्टलों के उपयोग, पंजीकरण, उपलब्ध सुविधाओं तथा शोध कार्यों में इनके प्रभावी इस्तेमाल के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सभी महाविद्यालयों एवं स्नातकोत्तर विभागों में हुई सामूहिक सहभागिता
इस कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि विश्वविद्यालय के सभी डिग्री महाविद्यालयों में संबंधित प्रधानाचार्यों के नेतृत्व में सामूहिक प्रसारण एवं सहभागिता की व्यवस्था की गई। महाविद्यालयों के सभागारों में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी एक साथ उपस्थित होकर कार्यक्रम से जुड़े। इसी प्रकार विश्वविद्यालय के सभी स्नातकोत्तर विभागों में भी स्मार्ट कक्षा के माध्यम से सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित की गई। इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय मुख्यालय से लेकर सभी महाविद्यालयों और विभागों तक डिजिटल शोध संसाधनों की जानकारी एक साथ पहुंचाई गई।

कार्यक्रम से पूर्व केंद्रीय पुस्तकालय के प्रभारी प्रो. दमन कुमार झा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय पुस्तकालय के उप प्रभारी डॉ. मनीष कुमार के अतिरिक्त अविनाश सहनी एवं गणेश पासवान का सहयोग सराहनीय रहा।
अंत में प्रो. दमन कुमार झा ने राज्यपाल सचिवालय, लोक भवन, पटना तथा इंफ्लिबनेट के वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्षों, महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
