एलएनएमयू के हिंदी विभाग में चित्र-यात्रा प्रदर्शनी एवं यात्रा-वृत्तांत पर विचार गोष्ठी आयोजित
बिहार, हिमाचल प्रदेश और नेपाल की साहित्यिक-सांस्कृतिक यात्राओं के यादगार चित्रों की लगी प्रदर्शनी, वक्ताओं ने बताया यात्रा का साहित्यिक महत्त्व
एलएनएमयू के हिंदी विभाग में चित्र-यात्रा प्रदर्शनी एवं यात्रा-वृत्तांत पर विचार गोष्ठी आयोजित
बिहार, हिमाचल प्रदेश और नेपाल की साहित्यिक-सांस्कृतिक यात्राओं के यादगार चित्रों की लगी प्रदर्शनी, वक्ताओं ने बताया यात्रा का साहित्यिक महत्त्व
जे टी न्यूज,
दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के हिंदी विभाग में चित्र-यात्रा प्रदर्शनी के साथ ‘यात्रा-वृत्तांत’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. विजय कुमार ने की, जबकि चित्र-यात्रा प्रदर्शनी का संयोजन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने किया। प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय की मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीता झा ने किया। इस अवसर पर पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. ए.के. बच्चन और राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने प्रदर्शनी की सराहना की।
प्रदर्शनी में वर्ष 2024 से 2026 के बीच विभागीय शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों द्वारा की गई विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्राओं के यादगार पलों को तस्वीरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इन यात्राओं का नेतृत्व प्रो. उमेश कुमार ने किया था। प्रदर्शनी में बिहार के राजनगर, मधुबनी, बोधगया, राजगीर और नालंदा के साथ हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू, मनाली, कोकसर और रोहतांग सहित नेपाल के जनकपुरधाम के चित्र शामिल रहे।
इन यात्राओं के दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विभिन्न स्थलों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। यात्रा से प्राप्त अनुभवों ने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को लेखन के लिए भी प्रेरित किया। उनके कई आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। प्रदर्शनी में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान एवं राष्ट्रपति निवास, शिमला सहित अन्य महत्त्वपूर्ण स्थलों के चित्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। वक्ताओं ने ऐसे संस्थानों को उच्च शिक्षा, शोध और बौद्धिक विकास के लिए प्रेरणादायक बताया।
यात्रा आत्मविश्वास बढ़ाती है और साहित्य को समृद्ध करती है: प्रो. पुनीता झा
प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रो. पुनीता झा ने कहा कि इस तरह की चित्र-यात्रा प्रदर्शनी शिक्षकों के साथ-साथ शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। जीवन में यात्रा का विशेष महत्त्व है। यह व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाती है और उसके अनुभवों को व्यापक बनाकर साहित्य को समृद्ध करती है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. विजय कुमार ने कहा कि यात्रा-वृत्तांत हिंदी साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है। हिंदी के अनेक साहित्यकारों ने इस विधा के माध्यम से विभिन्न स्थानों की सांस्कृतिक परिस्थितियों, सामाजिक जीवन और विशिष्टताओं से पाठकों को परिचित कराया है। यात्रा से मनुष्य के अनुभव परिष्कृत होते हैं और उसकी दृष्टि अधिक व्यापक बनती है।
यात्रा साहित्य और कला-सृजन को देती है नई प्रेरणा: प्रो. उमेश कुमार
प्रदर्शनी के संयोजक प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि यात्रा साहित्य और कला-सृजन के लिए नई प्रेरणा प्रदान करती है। यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभूतियां गहरी होती हैं और स्मृतियां लेखन को नया आधार देती हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य में यात्रा-वृत्तांत की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतेन्दु युग से इस विधा का विकास दिखाई देता है। राहुल सांकृत्यायन के साहित्य में घुमक्कड़ी और यात्रा-अनुभवों का विशेष योगदान रहा है। वहीं, अज्ञेय और नागार्जुन के घुमक्कड़ी जीवन ने भी उनकी साहित्यिक दृष्टि को नए आयाम दिए।
विभाग की शिक्षिका डॉ. मंजरी खरे ने कहा कि यात्रा जीवन को समझने का नया अर्थ प्रदान करती है और मानवीय अनुभूतियों को व्यापक बनाती है। उन्होंने अपने यात्रा-अनुभवों के संदर्भ में बताया कि ऐसी यात्राएं लेखन को नई दृष्टि देती हैं। कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली डॉ. बिंदु चौहान ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति से जुड़ी इस तरह की प्रदर्शनियां विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का आधार बनती हैं।

कार्यक्रम में मलय नीरव, सुभद्रा कुमारी, कंचन रजक, जय प्रकाश, रोहित पटेल, स्नेहा कुमारी, बेबी कुमारी, सूफिया खातून, अपर्णा, धीरज, सूरज, सदानन्द, प्रतिभा और मनीष सहित विभाग के शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
चित्र-यात्रा प्रदर्शनी और विचार गोष्ठी ने यात्रा, साहित्य, संस्कृति तथा शोध के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अनुभव-आधारित लेखन के लिए प्रेरित किया।

