त्रिवेणी संघ की विरासत सामाजिक परिवर्तन की विरासत है – डॉ.लक्ष्मण यादव
त्रिवेणी संघ की विरासत ही आज की चुनौतियों से मुकाबला करने की ताकत देती है
त्रिवेणी संघ की विरासत सामाजिक परिवर्तन की विरासत है – डॉ.लक्ष्मण यादव
त्रिवेणी संघ की विरासत ही आज की चुनौतियों से मुकाबला करने की ताकत देती है

जे टी न्यूज, पटना: त्रिवेणी संघ स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर पटना के जगजीवन राम संसदीय शोध संस्थान में वर्तमान की चुनौतियां और त्रिवेणी संघ की विरासत विषय पर गोष्ठी आयोजित किया गया। संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने संबोधित किया
उदय नारायण चौधरी ने कहा कि आज चुनाव पर भाजपा का कब्जा है। आर्थिक सामाजिक मुक्ति की लड़ाई लड़नी होगी। सामाजिक परिवर्तन के संघर्ष से ही स्थाई एवं परिवर्तनकारी राजनीतिक बदलाव संभव है। जाति से वर्ग की तरफ हमे बढ़ना होगा।
लेखक एवं पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर, डीयू डॉ लक्ष्मण यादव ने कहा कि समाज को विचार शून्य होने से बचाना होगा। त्रिवेणी संघ की विरासत एकजुटता और सामाजिक परिवर्तन की विरासत है। आज भारत के अर्जित लोकतंत्र पर हमला है। आज का चुनाव को दिखाया जा रहा है कि न्यायप्रिय है लेकिन ठीक उसका उल्टा हो रहा है।लाखों लोगों को वोट के अधिकार से वंचित कर दिया जा रहा है। युवाओं से उनके नौकरी का अधिकार छीना जा रहा है। बंगाल चुनाव ने हमे यह अनुभव कराया है कि देश एक सदी पीछे जा रहा है, जहां संविधान नहीं था।
सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के संयोजक रिंकू यादव ने कहा कि विकृत इतिहास के साथ हम वर्तमान की चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकते हैं।आधुनिक भारत ने अब तक जो उपलब्धियां हासिल की थी वो छीना जा रहा है। त्रिवेणी संघ ने जो बड़ी एकता का सपना देखा था वो टूटता हुआ नजर आ रहा है। एक पिछड़े तबकों के व्यक्ति को मुखौटा बना कर उत्पीड़ित समाज के अधिकारों को छीना जा रहा है और बिहार को कॉर्पोरेट लूट का अड्डा बनाया जा रहा है। बिहार को आज की चुनौती का मुकाबला करना है तो हमें त्रिवेणी संघ की विरासत को लेकर आगे जाना है।
सामाजिक कार्यकर्ता वंदना प्रभा ने कहा कि आज देश पर मनुवाद और पितृसत्ता को पुनः मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान की सरकार महिलाओं को हथियार बना रही है बल्कि सवाल उनके मुक्ति का है। महिला आरक्षण में दलित पिछड़ी जातियों के महिलाओं को उचित हिस्सेदारी की लड़ाई प्रमुख लड़ाई है। महिलाओं को लाभार्थी योजनाएं सिर्फ नहीं चाहिए उन्हें अपना अधिकार चाहिए।
पत्रकार सिद्धार्थ रामू ने कहा कि हमें त्रिवेणी संघ की विरासत को लेकर आगे बढ़ना होगा। आजतक वंचितों की सरकार वोट के बल पर आई थी लेकिन आज उसे छीना जा चुका है। चुनाव से पहले SIR के नाम पर वोट काटे जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियां जीत जा रही है तो उनके यहां सीबीआई के माध्यम से डरा के खरीद लिया जा रहा है।देश के 10% लोगों का देश के 90% संसाधनों पर कब्जा है।
पूर्व विधायक एवं आरवाईए राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने कहा कि त्रिवेणी संघ तीन जातियों का गठजोड़ नहीं है। और बिहार में क्रमशः तीन जातियों के मुख्यमंत्री बन जाने से त्रिवेणी संघ का संकल्प पुरा नहीं हुआ है। त्रिवेणी संघ के खिलाफ वर्तमान की भाजपा आरएसएस खड़ी है। त्रिवेणी संघ के सन्देश को आत्मसात करते हुए हमे आगे बढ़ना होगा।
संगोष्ठी को शोधार्थी विकाश यादव, सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर चौधरी, दुर्गेश कुमार ,रमेश, पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता मनीष रंजन, विश्वा यादव, सूरज यादव, देवशंकर आर्या, सबा आफरीन , देवशंकर आर्या ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम से निम्न प्रस्ताव पारित किया गया।
*जाति जनगणना को राष्ट्रीय जनगणना का हिस्सा बनाया जाए।
बिहार में 65 प्रतिशत आरक्षण को संवैधानिक सुरक्षा मिले।*
विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव के विरुद्ध सशक्त रोहित एक्ट बने।*
बुलडोजर राजनीति पर रोक लगे, सभी को आवास का अधिकार मिले।*
सैटेलाइट टाउनशिप और लैंड पुलिंग के नाम पर भूमि अधिग्रहण बंद हो।*
पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।*
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और एनकाउंटर राज का विरोध।*
महिला आरक्षण तत्काल लागू हो, कोटा में कोटा सुनिश्चित हो।*
सामाजिक न्याय की ताकतों की व्यापक एकता का आह्वान*
