ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में “Gen Z एवं भारतीय राजनीतिक व्यवस्था” पर विशेष व्याख्यान
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में “Gen Z एवं भारतीय राजनीतिक व्यवस्था” पर विशेष व्याख्यान

जे टी न्यूज, दरभंगा:
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग में बुधवार को “Gen Z एवं भारतीय राजनीतिक व्यवस्था” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन कौटिल्य कक्ष में किया गया। कार्यक्रम में विभाग के प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. मनोज कुमार के स्वागत वक्तव्य से हुआ। उन्होंने आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं, विशेषकर Gen Z, की बदलती भूमिका तथा समकालीन राजनीति में उनकी बढ़ती भागीदारी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
विषय प्रवेश कराते हुए प्रो. मुनेश्वर यादव ने राजनीतिक विचारों एवं समकालीन राजनीतिक संकटों के वैज्ञानिक और तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने लूशियन पाई एवं डेविड ईस्टन के विचारों का संदर्भ देते हुए युवाओं से समकालीन राजनीतिक घटनाक्रमों का निष्पक्ष, तार्किक एवं तथ्यपरक विश्लेषण करने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र नारायण ने भारतीय राजनीतिक दर्शन तथा आचार्य चाणक्य के विचारों का उल्लेख करते हुए राज्य की आवश्यकता और भूमिका पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मानव समाज के सुव्यवस्थित संचालन के लिए राज्य व्यवस्था आवश्यक है। राज्य के अभाव में अराजकता और ‘मत्स्य न्याय’ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आचार्य चाणक्य एवं कौटिल्यीय परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य व्यवस्था का उद्देश्य जनकल्याण और सामाजिक व्यवस्था को सुनिश्चित करना होना चाहिए तथा शासक को सदैव राजधर्म और प्रजा के हितों का ध्यान रखना चाहिए।

डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विचारों का संदर्भ देते हुए प्रो. नारायण ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के प्रति असहमति व्यक्त करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, असहमति का स्वरूप संवैधानिक और लोकतांत्रिक होना चाहिए। उन्होंने Gen Z के युवाओं से अपील की कि वे किसी के बहकावे में आकर अराजकता या हिंसक गतिविधियों का मार्ग न अपनाएं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर देश के निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने जेपी आंदोलन और अन्ना आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में युवाओं की सक्रिय भागीदारी का एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में राजनीतिक संचार के माध्यम भले ही बदल गए हों, लेकिन युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से तथ्यों की जांच कर निष्पक्ष, तार्किक और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रघुवीर रंजन ने मुख्य वक्ता, विभागाध्यक्ष, सभी प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
समग्र रूप से कार्यक्रम में Gen Z की राजनीतिक भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक व्यवस्था तथा समकालीन भारतीय राजनीति में युवाओं की जिम्मेदारियों पर सार्थक चर्चा हुई।
