स्थानीय कला संस्कृति के पोषण, संरक्षण और संवर्धन केलिए प्रतिबद्ध है आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र : जूही कुमारी, जे टी न्यूज, समस्तीपुर: जिले के सांस्कृतिक प्रतिभा को नई ऊंचाई प्रदान करने की दिशा में एक मजबूत पहल है आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अधीन संचालित इस केंद्र में अब प्रशिक्षण व्यवस्था को व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया गया है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी जूही कुमारी ने संवाददाता से विशेष बात–चीत के दौरान उक्त जानकारी देते हुए बताया कि, स्थानीय कला संस्कृति के पोषण, संरक्षण और संवर्धन केलिए प्रतिबद्ध है यह केंद्र। जहां स्थापित कलाकारों के संरक्षण में नई पीढ़ी के कलाकार आकार लेंगे। उन्होंने बताया कि, प्रशिक्षण की समय सारिणी जारी कर दी गई है। साथ ही साप्ताहिक मूल्यांकन तथा अतिरिक्त अभ्यास कक्षा की व्यवस्था भी लागू की गई है। श्रीमती जूही ने बताया कि, केंद्र में गायन सीनियर, गायन जूनियर, वादन सीनियर, वादन जूनियर, कथक सीनियर तथा कथक जूनियर सहित कुल छह कक्षाएं संचालित की जा रही है। प्रत्येक समूह को सप्ताह में चार दिन नियमित कक्षा, एक दिन मूल्यांकन तथा एक दिन अतिरिक्त कक्षा मिलेगी। प्रत्येक कक्षा दो घंटे की होगी। इसr प्रकार प्रत्येक प्रशिक्षु को सप्ताह में कुल 12 घंटे का प्रशिक्षण प्राप्त होगा। सीनियर समूह की कक्षाएं दोपहर दो बजे से 4 बजे तथा जूनियर समूह की कक्षाएं शाम चार बजे से छह बजे तक संचालित होंगी। प्रशिक्षण में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों पर समान रूप से जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि, शास्त्रीय संगीत गायन, कथक, तबला वादन एवं हारमोनियम वादन के कुल 60 प्रशिक्षुओं की सूची भी जारी कर दी गई है। शास्त्रीय संगीत एवं हारमोनियम का प्रशिक्षण संगीत शिक्षक किशन कुमार मलिक, कथक का प्रशिक्षण नृत्य शिक्षक लक्ष्मण कुमार, भारत नाट्यम का प्रशिक्षण सुनिधि रॉय एवं तबला वादन का प्रशिक्षण संगीत शिक्षक अभिषेक भारती देंगे। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्रीमती जूही ने बताया कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि ऐसी सांस्कृतिक पीढ़ी तैयार करना है जो समस्तीपुर और मिथिला की पारंपरिक कला संस्कृति को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सके। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण ही किसी कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी होती है। इसी सोच के साथ केंद्र में ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को सीखने का समान अवसर मिले। विद्यार्थियों से नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने की अपील की।
स्थानीय कला संस्कृति के पोषण, संरक्षण और संवर्धन केलिए प्रतिबद्ध है आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र : जूही कुमारी,

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: जिले के सांस्कृतिक प्रतिभा को नई ऊंचाई प्रदान करने की दिशा में एक मजबूत पहल है आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अधीन संचालित इस केंद्र में अब प्रशिक्षण व्यवस्था को व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया गया है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी जूही कुमारी ने संवाददाता से विशेष बात–चीत के दौरान उक्त जानकारी देते हुए बताया कि, स्थानीय कला संस्कृति के पोषण, संरक्षण और संवर्धन केलिए प्रतिबद्ध है यह केंद्र। जहां स्थापित कलाकारों के संरक्षण में नई पीढ़ी के कलाकार आकार लेंगे।
उन्होंने बताया कि, प्रशिक्षण की समय सारिणी जारी कर दी गई है। साथ ही साप्ताहिक मूल्यांकन तथा अतिरिक्त अभ्यास कक्षा की व्यवस्था भी लागू की गई है। श्रीमती जूही ने बताया कि, केंद्र में गायन सीनियर, गायन जूनियर, वादन सीनियर, वादन जूनियर, कथक सीनियर तथा कथक जूनियर सहित कुल छह कक्षाएं संचालित की जा रही है। प्रत्येक समूह को सप्ताह में चार दिन नियमित कक्षा, एक दिन मूल्यांकन तथा एक दिन अतिरिक्त कक्षा मिलेगी। प्रत्येक कक्षा दो घंटे की होगी। इसr प्रकार प्रत्येक प्रशिक्षु को सप्ताह में कुल 12 घंटे का प्रशिक्षण प्राप्त होगा। सीनियर समूह की कक्षाएं दोपहर दो बजे से 4 बजे तथा जूनियर समूह की कक्षाएं शाम चार बजे से छह बजे तक संचालित होंगी। प्रशिक्षण में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों पर समान रूप से जोर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि, शास्त्रीय संगीत गायन, कथक, तबला वादन एवं हारमोनियम वादन के कुल 60 प्रशिक्षुओं की सूची भी जारी कर दी गई है। शास्त्रीय संगीत एवं हारमोनियम का प्रशिक्षण संगीत शिक्षक किशन कुमार मलिक, कथक का प्रशिक्षण नृत्य शिक्षक लक्ष्मण कुमार, भारत नाट्यम का प्रशिक्षण सुनिधि रॉय एवं तबला वादन का प्रशिक्षण संगीत शिक्षक अभिषेक भारती देंगे। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्रीमती जूही ने बताया कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि ऐसी सांस्कृतिक पीढ़ी तैयार करना है जो समस्तीपुर और मिथिला की पारंपरिक कला संस्कृति को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सके। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण ही किसी कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी होती है। इसी सोच के साथ केंद्र में ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को सीखने का समान अवसर मिले। विद्यार्थियों से नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने की अपील की।

