‘ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो’ की मांग पर 23 नवंबर को राजभवन मार्च, 2 से नुक्कड़ सभा अभियान
ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के नारे के साथ शहीद चौक से राजभवन तक निकलेगा मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन
‘ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो’ की मांग पर 23 नवंबर को राजभवन मार्च, 2 से नुक्कड़ सभा अभियान
‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के नारे के साथ शहीद चौक से राजभवन तक निकलेगा मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन

जे टी न्यूज,
रांची: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर झारखंड में आंदोलन तेज करने की तैयारी है। इसके तहत आगामी 23 नवंबर को रांची के शहीद चौक से राजभवन तक विरोध मार्च निकालने तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया है। वहीं, 2 नवंबर से 22 नवंबर तक राज्य के विभिन्न वार्डों, गांवों और कस्बों में नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
इस संबंध में रविवार को विश्वकर्मा मंदिर लेन स्थित सफदर हाशमी हॉल, रांची में ‘जन के खिलाफ एसआईआर, झारखंड’ के तत्वावधान में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता दयामनी बारला ने की। इसमें विभिन्न किसान, मजदूर, आदिवासी, छात्र-युवा, कर्मचारी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं के मताधिकार की रक्षा करना है, इसलिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होनी चाहिए।
झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुफल महतो, आदिवासी अधिकार मंच के अध्यक्ष प्रफुल्ल लिंडा, सीआईटीयू के समीर दास, एक्टू नेता सुभेदु सेन, प्रतीक मिश्रा, सिराज भाई, आदिवासी छात्र संघ की सुशीला उरांव, अर्थशास्त्री जयांदरेज, अमल आजाद, एम.जेड. खान, एस.के. राय, एडवा की महासचिव बीणा लिंडा, खेत मजदूर यूनियन के संयोजक वीरेंद्र कुमार तथा बैंक यूनियन के एम.एन. सिंह सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने बैठक को संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान को व्यापक जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से देश में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काटे जाने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर भी वक्ताओं ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक में 1 नवंबर को विपक्ष की ओर से आयोजित रैली का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के संघर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने दावा किया कि यह अभियान देशव्यापी जनसमर्थन हासिल कर रहा है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 2 से 22 नवंबर तक नुक्कड़ सभाओं के जरिए आम लोगों को एसआईआर और मतदाता अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके बाद 23 नवंबर को शहीद चौक से राजभवन तक विरोध मार्च निकालकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।

