राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026: बच्चों के समग्र विकास के लिए जन-जन तक पोषण जागरूकता का अभियान पहले 1000 दिनों पर विशेष फोकस, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का आह्वान जे टी न्यूज, मधेपुरा : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं समाज कल्याण विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान वर्ष में दो बार मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समुदाय स्तर पर पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट है कि मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है, जिसमें जीवन के पहले 1000 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में संतुलित पोषण, उचित देखभाल एवं सकारात्मक वातावरण बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं संज्ञानात्मक विकास की नींव रखते हैं। राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य बच्चों के जीवन के प्रारंभिक छह वर्षों में बेहतर पोषण एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। इसके लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं, अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है— मातृ एवं शिशु पोषण: गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार एवं नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा देना। स्तनपान का महत्व: शिशु की प्रतिरक्षा क्षमता एवं मस्तिष्क विकास के लिए स्तनपान को प्रोत्साहित करना। पूरक आहार: 6 माह के बाद बच्चों को आयु के अनुसार पौष्टिक आहार देना। प्रारंभिक उत्तेजना (0–3 वर्ष): बच्चों के मानसिक एवं भाषाई विकास हेतु संवाद, खेल एवं गतिविधियों को बढ़ावा देना। आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभिभावकों के लिए जागरूकता सत्र, बच्चों के विकास से जुड़ी गतिविधियाँ के तहत प्रारंभिक उत्तेजना कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही, भाषा विकास सत्र, माता-पिता के साथ संवाद कार्यक्रम एवं बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय संसाधनों से कम लागत वाले शैक्षणिक खिलौनों के निर्माण हेतु कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे बच्चों में रचनात्मकता एवं मोटर स्किल्स का विकास हो सके। वर्तमान समय में बढ़ते स्क्रीन टाइम को देखते हुए अभिभावकों एवं समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों के समुचित विकास के लिए स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग को कम करने एवं सकारात्मक गतिविधियों को अपनाने पर बल दिया जा रहा है। जिला कार्यक्रम कार्यालय द्वारा अपील की गई है कि सभी नागरिक इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा स्वस्थ, सशक्त एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026: बच्चों के समग्र विकास के लिए जन-जन तक पोषण जागरूकता का अभियान

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पहले 1000 दिनों पर विशेष फोकस, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का आह्वान

जे टी After, मधेपुरा :
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं समाज कल्याण विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान वर्ष में दो बार मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समुदाय स्तर पर पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।

वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट है कि मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है, जिसमें जीवन के पहले 1000 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में संतुलित पोषण, उचित देखभाल एवं सकारात्मक वातावरण बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं संज्ञानात्मक विकास की नींव रखते हैं।

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य बच्चों के जीवन के प्रारंभिक छह वर्षों में बेहतर पोषण एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। इसके लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं, अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इस अभियान के अंतर्गत निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—

मातृ एवं शिशु पोषण: गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार एवं नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा देना।

स्तनपान का महत्व:
शिशु की प्रतिरक्षा क्षमता एवं मस्तिष्क विकास के लिए स्तनपान को प्रोत्साहित करना।

पूरक आहार:
6 माह के बाद बच्चों को आयु के अनुसार पौष्टिक आहार देना।

प्रारंभिक उत्तेजना (0–3 वर्ष): बच्चों के मानसिक एवं भाषाई विकास हेतु संवाद, खेल एवं गतिविधियों को बढ़ावा देना।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभिभावकों के लिए जागरूकता सत्र, बच्चों के विकास से जुड़ी गतिविधियाँ के तहत प्रारंभिक उत्तेजना कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही, भाषा विकास सत्र, माता-पिता के साथ संवाद कार्यक्रम एवं बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, स्थानीय संसाधनों से कम लागत वाले शैक्षणिक खिलौनों के निर्माण हेतु कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे बच्चों में रचनात्मकता एवं मोटर स्किल्स का विकास हो सके।

वर्तमान समय में बढ़ते स्क्रीन टाइम को देखते हुए अभिभावकों एवं समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों के समुचित विकास के लिए स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग को कम करने एवं सकारात्मक गतिविधियों को अपनाने पर बल दिया जा रहा है।

जिला कार्यक्रम कार्यालय द्वारा अपील की गई है कि सभी नागरिक इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा स्वस्थ, सशक्त एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026: बच्चों के समग्र विकास के लिए जन-जन तक पोषण जागरूकता का अभियान

 

पहले 1000 दिनों पर विशेष फोकस, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का आह्वान

 

जे टी न्यूज, मधेपुरा :

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं समाज कल्याण विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान वर्ष में दो बार मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समुदाय स्तर पर पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।

 

वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट है कि मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है, जिसमें जीवन के पहले 1000 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में संतुलित पोषण, उचित देखभाल एवं सकारात्मक वातावरण बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं संज्ञानात्मक विकास की नींव रखते हैं।

 

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य बच्चों के जीवन के प्रारंभिक छह वर्षों में बेहतर पोषण एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। इसके लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं, अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

इस अभियान के अंतर्गत निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—

 

मातृ एवं शिशु पोषण: गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार एवं नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा देना।

 

स्तनपान का महत्व:

शिशु की प्रतिरक्षा क्षमता एवं मस्तिष्क विकास के लिए स्तनपान को प्रोत्साहित करना।

 

पूरक आहार:

6 माह के बाद बच्चों को आयु के अनुसार पौष्टिक आहार देना।

 

प्रारंभिक उत्तेजना (0–3 वर्ष): बच्चों के मानसिक एवं भाषाई विकास हेतु संवाद, खेल एवं गतिविधियों को बढ़ावा देना।

 

 

आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभिभावकों के लिए जागरूकता सत्र, बच्चों के विकास से जुड़ी गतिविधियाँ के तहत प्रारंभिक उत्तेजना कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही, भाषा विकास सत्र, माता-पिता के साथ संवाद कार्यक्रम एवं बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 

इसके अतिरिक्त, स्थानीय संसाधनों से कम लागत वाले शैक्षणिक खिलौनों के निर्माण हेतु कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे बच्चों में रचनात्मकता एवं मोटर स्किल्स का विकास हो सके।

 

वर्तमान समय में बढ़ते स्क्रीन टाइम को देखते हुए अभिभावकों एवं समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों के समुचित विकास के लिए स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग को कम करने एवं सकारात्मक गतिविधियों को अपनाने पर बल दिया जा रहा है।

 

जिला कार्यक्रम कार्यालय द्वारा अपील की गई है कि सभी नागरिक इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा स्वस्थ, सशक्त एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

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