संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज का सात दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण संपन्न

सुंदरवन की जैव-विविधता से कोलकाता की सांस्कृतिक विरासत तक: प्रशिक्षुओं ने अनुभव से सीखा जीवन का पाठ

संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज का सात दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण संपन्न
सुंदरवन की जैव-विविधता से कोलकाता की सांस्कृतिक विरासत तक: प्रशिक्षुओं ने अनुभव से सीखा जीवन का पाठ

जे टी न्यूज़, समस्तीपुर/बिरसिंहपुर: “यात्रा केवल स्थान बदलना नहीं, बल्कि दृष्टि का विस्तार करना है।” इसी शैक्षिक दृष्टिकोण को सार्थक करते हुए संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, बिरसिंहपुर, समस्तीपुर के स्वायत्त एवं नैक बी++ मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन शैक्षणिक परिभ्रमण समिति के तत्वावधान में समिति के समन्वयक एवं सदस्यों के मार्गदर्शन में किया गया।
यह परिभ्रमण प्रशिक्षुओं के लिए महज पर्यटन यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण, भूगोल, वन्यजीवन, लोकसंस्कृति, आध्यात्मिकता और भारतीय विरासत को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का जीवंत शैक्षिक अवसर रहा।
सुंदरवन में प्रकृति और पारिस्थितिकी का प्रत्यक्ष अध्ययन
परिभ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने पश्चिम बंगाल के सुंदरवन एवं डेल्टा क्षेत्र का अवलोकन किया। मैंग्रोव वन, ज्वारीय जलमार्ग, जैव-विविधता और स्थानीय जीवन के बीच प्रकृति तथा मानव के संबंधों को समझने का अवसर मिला। सुंदरवन विश्व के महत्वपूर्ण मैंग्रोव पारितंत्रों में शामिल है तथा रॉयल बंगाल टाइगर सहित विविध वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं के लिए प्रसिद्ध है।
प्रशिक्षुओं ने इस दौरान यह समझने का प्रयास किया कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय समुदायों का जीवन किस प्रकार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इस अनुभव ने पर्यावरण शिक्षा को पुस्तकीय अवधारणाओं से निकालकर वास्तविक जीवन के संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान किया।
टाइगर हिल पर प्रकृति के विराट स्वरूप का अनुभव
परिभ्रमण दल ने दार्जिलिंग के टाइगर हिल का भी भ्रमण किया। सूर्योदय के समय हिमालयी पर्वत-शृंखला और कंचनजंघा के मनोरम दृश्य ने प्रशिक्षुओं को प्रकृति की भव्यता और विविधता से रूबरू कराया। टाइगर हिल से स्वच्छ मौसम में कंचनजंघा सहित दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है

यह अनुभव प्रशिक्षुओं के लिए भूगोल, प्राकृतिक पर्यावरण, जलवायु और पर्वतीय पारिस्थितिकी को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर बना।
लोकसंस्कृति और समुद्र तटीय जीवन का अध्ययन
यात्रा के दौरान प्रशिक्षुओं ने स्थानीय लोकसंस्कृति, रहन-सहन, सामाजिक जीवन और समुद्र तटीय परिवेश को भी नजदीक से देखा। विभिन्न क्षेत्रों की जीवनशैली और सांस्कृतिक विविधता को समझते हुए प्रशिक्षुओं ने भारतीय समाज की ‘विविधता में एकता’ की विशेषता को अनुभव किया।
दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से परिचय
परिभ्रमण के अगले चरण में कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर एवं बेलूर मठ का भ्रमण कराया गया। दक्षिणेश्वर काली मंदिर बंगाल की धार्मिक एवं स्थापत्य परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है तथा इसका संबंध श्रीरामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक परंपरा से रहा है।
वहीं बेलूर मठ में प्रशिक्षुओं ने स्वामी विवेकानंद एवं रामकृष्ण मिशन की मानव सेवा, आध्यात्मिक समन्वय और सामाजिक सरोकारों की परंपरा को समझने का अवसर प्राप्त किया।
प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी ने बताया- ‘अनुभव ही शिक्षा को बनाता है जीवंत’
इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी ने कहा कि “शैक्षणिक परिभ्रमण शिक्षा को कक्षा की चारदीवारी से निकालकर जीवन के वास्तविक अनुभवों से जोड़ता है। भावी शिक्षक के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है; उसे प्रकृति, समाज, संस्कृति, इतिहास और मानवीय जीवन को प्रत्यक्ष रूप से समझना भी आवश्यक है।


उन्होंने कहा कि ऐसी यात्राएँ प्रशिक्षुओं में अवलोकन शक्ति, जिज्ञासा, सहयोग की भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और पर्यावरणीय चेतना का विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक स्वयं अनुभव से सीखता है, वही अपने विद्यार्थियों के लिए सीखने को अधिक रोचक, जीवंत और अनुभवात्मक बना सकता है।
समिति के समन्वयक एवं सदस्यों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
सात दिवसीय परिभ्रमण को सुव्यवस्थित एवं शैक्षिक स्वरूप प्रदान करने में शैक्षणिक परिभ्रमण समिति के समन्वयक एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षुओं ने विभिन्न स्थलों का अनुशासनपूर्वक भ्रमण करते हुए प्रत्येक स्थान को अध्ययन, अवलोकन और अनुभव से जोड़ने का प्रयास किया।
समापन अवसर पर प्रशिक्षुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस यात्रा ने उन्हें पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु को वास्तविक परिवेश में देखने और समझने का अवसर दिया। प्रकृति की निकटता, स्थानीय संस्कृति का अनुभव और ऐतिहासिक-आध्यात्मिक स्थलों का अवलोकन उनके लिए अविस्मरणीय शैक्षिक अनुभव रहा।

इस प्रकार संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज का यह सात दिवसीय शैक्षणिक परिभ्रमण ‘देखो, समझो, अनुभव करो और सीखो’ की अवधारणा को साकार करते हुए संपन्न हुआ। यात्रा ने प्रशिक्षुओं को केवल नए स्थान नहीं दिखाए, बल्कि उनकी दृष्टि को व्यापक, संवेदनशील और अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।

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