सहयोग शिविर के नाम पर महज खानापूर्ति! जिला प्रशासन की कार्यशैली पर राकेश कुमार ने उठाए सवाल
जितवारपुर कुम्हिरा पंचायत में शिविर की सूचना आम लोगों तक नहीं पहुंचने का आरोप; अधिकारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर भी मांगा जवाब
सहयोग शिविर के नाम पर महज खानापूर्ति! जिला प्रशासन की कार्यशैली पर राकेश कुमार ने उठाए सवाल
जितवारपुर कुम्हिरा पंचायत में शिविर की सूचना आम लोगों तक नहीं पहुंचने का आरोप; अधिकारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर भी मांगा जवाब

जे टी न्यूज,
समस्तीपुर: सरायरंजन प्रखंड की जितवारपुर कुम्हिरा पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार ने शिविर के आयोजन को महज खानापूर्ति बताते हुए जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित शिविर में न तो समुचित प्रचार-प्रसार किया गया और न ही आम लोगों की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीरता दिखाई गई।
राकेश कुमार के अनुसार, मंगलवार को आयोजित इस शिविर की सूचना पंचायत सचिव को पंचायत के प्रत्येक वार्ड में पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद पंचायत के एक प्रतिशत लोगों तक भी शिविर की जानकारी नहीं पहुंच सकी। उनका आरोप है कि आनन-फानन में कुछ चुनिंदा लोगों और स्वच्छता कर्मियों को बुलाकर शिविर आयोजित कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम जनता को शिविर की जानकारी ही नहीं थी, तो फिर यह आयोजन किसके लिए किया गया?
राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि शिविर में पहुंचे अधिकारी और कर्मचारी कुछ देर रुककर तस्वीरें खिंचवाने के बाद चले गए। उन्होंने कहा कि यदि शिविर का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना था, तो अधिकारियों को लोगों की शिकायतें सुनने और उनका निपटारा करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए था। केवल तस्वीर खिंचवाकर औपचारिकता पूरी करना जनहित के साथ मजाक है।
उन्होंने शिविर में मौजूद पंचायती राज पदाधिकारी से कैमरे के सामने कई सवाल भी किए। आवास सहायक से पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में कथित तौर पर 90 प्रतिशत से अधिक अपात्र लोगों के नाम शामिल होने के संबंध में सवाल पूछा। राकेश कुमार ने यह भी जानना चाहा कि ऐसे नाम किस आधार पर और किसके निर्देश पर जोड़े गए। उनके मुताबिक, संबंधित कर्मी इन सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय तकनीकी और सरकारी प्रक्रियाओं का हवाला देते नजर आए।

अधिकारियों की उपस्थिति को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाया। राकेश कुमार के अनुसार, जिला प्रशासन की ओर से शिविर में अपर समाहर्ता ब्रजेश कुमार की उपस्थिति की जानकारी मिली थी। जब उन्होंने पंचायती राज पदाधिकारी से उनके निर्धारित कार्यक्रम के बारे में पूछा तो 30 मिनट का समय बताया गया। वहीं, राकेश कुमार का दावा है कि दूरभाष पर अपर समाहर्ता ने स्वयं उन्हें सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक का समय निर्धारित होने की जानकारी दी। शिविर में मौजूद लोगों से पूछने पर उन्हें बताया गया कि अधिकारी आए, तस्वीर खिंचवाई और चले गए।
राकेश कुमार ने मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि जब पंचायत स्तर पर आयोजित सहयोग शिविर में ही आम जनता को जानकारी नहीं मिल रही और अधिकारी केवल औपचारिकता निभा रहे हैं, तो सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचेगा? उन्होंने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराने, पंचायत सचिव एवं संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय करने तथा शिविर के आयोजन और अधिकारियों की उपस्थिति की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकारी शिविर जनता की सुविधा और समस्याओं के समाधान के लिए होते हैं, न कि केवल सरकारी तस्वीरें और रिपोर्ट तैयार करने के लिए। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में वास्तविक जनभागीदारी हो और लोगों की शिकायतों का मौके पर समाधान किया जाए।
