बजट 2026 : आंकड़ों का जादू, ज़मीनी हकीकत से दूरी

बजट 2026 : आंकड़ों का जादू, ज़मीनी हकीकत से दूरी

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: आम बजट 2026 को सरकार ने विकास और उपलब्धियों के चमकदार आंकड़ों के साथ पेश किया है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे अलग नज़र आती है। यह बजट जनता-विरोधी, किसान-विरोधी, छात्र-विरोधी, महिला-विरोधी और मध्यम वर्ग के खिलाफ प्रतीत होता है। सरकार ने आंकड़ों का ऐसा जादू दिखाया है, जिसमें आम आदमी की परेशानियाँ ओझल हो गई हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बाद शिक्षा आम परिवार की पहुँच से बाहर होती जा रही है। जहाँ पहले स्नातक की पढ़ाई 4500–5000 रुपये में पूरी हो जाती थी, वहीं अब वही पढ़ाई 20,000–22,000 रुपये तक पहुँच गई है। यह छात्रों और मध्यम वर्ग पर सीधा बोझ है। देश में 48 केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद ओबीसी, एससी/एसटी वर्ग की सीटें खाली पड़ी हैं, जो सामाजिक न्याय पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रेल किराया कम नहीं हुआ, बड़े-बड़े अस्पतालों की इमारतें खड़ी कर दी गईं, लेकिन डॉक्टरों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है। उज्ज्वला योजना लगभग ठप पड़ी है। गरीब महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन तो मिले, लेकिन आज गैस सिलेंडर 1000 रुपये में मिल रहा है, जिसे भरवाना आम और गरीब परिवारों के लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे में यह योजना कागज़ों में सफल और रसोई में असफल साबित हो रही है। आम लोगों के लिए घर बनाना मुश्किल है क्योंकि बालू की किल्लत ने निर्माण को महँगा कर दिया है। किसानों की आय, महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर बजट खामोश दिखता है।

कुल मिलाकर, यह बजट काग़ज़ों में मजबूत है, लेकिन जनता की ज़िंदगी में राहत देने में कमजोर साबित होता है।
– डॉ. सीता कुमारी
सहायक प्राध्यापक, गृहविज्ञान, जी.के.पी.डी. कॉलेज, कर्पूरीग्राम, समस्तीपुर
-सह-सचिव, आनंद दृष्टि, समस्तीपुर

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