बिहार बजट सिर्फ़ घोषणाओं का पुलिंदा, ज़मीन पर हालात बदतर — कृष्ण कांत झा गुड्डू
बिहार बजट सिर्फ़ घोषणाओं का पुलिंदा, ज़मीन पर हालात बदतर — कृष्ण कांत झा गुड्डू

जे टी न्यूज,मधुबनी : बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान सचिव एवं वरिष्ठ नेता कृष्ण कांत झा गुड्डू ने बिहार सरकार द्वारा प्रस्तुत ₹3,47,589 करोड़ के बजट को “सब्ज़बाग़ दिखाने वाला बजट” बताते हुए कहा कि पिछली बार से ₹30,694 करोड़ अधिक होने के बावजूद यह बजट आम बिहारियों की ज़िंदगी में कोई वास्तविक सुधार नहीं लाता।
उन्होंने कहा कि बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण कार्य, पंचायती राज, समाज कल्याण और पथ निर्माण की बातें तो की गई हैं, लेकिन सिर्फ़ घोषणाओं से पेट नहीं भरता। शिक्षा के लिए ₹8,000 करोड़ अतिरिक्त देने का दावा किया जा रहा है, जबकि पूरे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता बदहाल है। सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि मिड-डे मील के लिए जाते हैं। शिक्षक अपनी नौकरी बचाने के लिए नामांकन बढ़ाने के दबाव में हैं, गणना पूरी न होने पर स्कूल बंद होने का डर है, और शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है।
कृष्ण कांत झा गुड्डू ने कहा कि जिस कौशल विकास योजना में पहले ही 94 प्रतिशत तक लूट हो चुकी है, उसी में और अवसर देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। महंगाई से राहत या उसे नियंत्रित करने को लेकर बजट पूरी तरह मौन है।
स्वास्थ्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि काग़ज़ों में योजनाएँ अच्छी लगती हैं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि अस्पतालों में मरीजों को न तो समय पर भर्ती मिलती है और न ही इलाज, परेशान होकर लोगों की जान तक चली जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायतों के लिए बजट में बढ़ोतरी आगामी पंचायत चुनाव को ध्यान में रखकर की गई है। चीनी मिलों की बात बीते 20 वर्षों से सिर्फ़ काग़ज़ों में हो रही है। महिला सशक्तिकरण के नाम पर सिर्फ़ घूसखोरी फल-फूल रही है और महिला रोजगार के नाम पर कर्ज़ बांटकर परिवारों को कर्ज़ के जाल में फँसाया जा रहा है।

कानून-व्यवस्था पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में बलात्कार, हत्या, लूट और दुराचार आम बात हो गई है। बच्चियाँ घर से निकलें तो परिजनों की रातों की नींद उड़ जाती है, लेकिन बजट में सबसे पहले जिस सुरक्षा की बात होनी चाहिए थी, उस पर गंभीर चर्चा नहीं है।
शराबबंदी पर उन्होंने कहा कि इससे न केवल राज्य के राजस्व को नुकसान हुआ है, बल्कि सूखे नशे का कारोबार तेज़ी से बढ़ा है और बेरोज़गार युवा इसमें फँसते जा रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
मनरेगा को लेकर उन्होंने कहा कि मजदूरों को लाभ पहुँचाने के बजाय इसकी री-पैकेजिंग कर लूट को जारी रखा गया है। किसानों पर समुचित ध्यान नहीं दिया गया। प्रशासन और शासन को भ्रष्टाचार-मुक्त करना, रोज़गार, सुरक्षा और स्वास्थ्य में सुधार लाना ही असली प्राथमिकताएँ होनी चाहिए थीं।
उन्होंने कहा कि बिहार में पुल-पुलिया दो दिनों में गिर जाते हैं, भ्रष्टाचार चरम पर है, फिर भी “डबल इंजन सरकार” का नारा ज़ोर-शोर से चलाया जा रहा है, जबकि ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।


