बिहार में ₹1.21 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव, 68 हजार से ज्यादा रोजगार की संभावना
उद्योग विभाग ने वर्ष 2025 से अब तक की उपलब्धियां गिनाईं, औद्योगिक भूमि, एम एस एम ई, स्टार्टअप और नई तकनीक पर विशेष जोर
बिहार में ₹1.21 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव, 68 हजार से ज्यादा रोजगार की संभावना
उद्योग विभाग ने वर्ष 2025 से अब तक की उपलब्धियां गिनाईं, औद्योगिक भूमि, एम एस एम ई, स्टार्टअप और नई तकनीक पर विशेष जोर
जे टी न्यूज,

पटना: बिहार को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने औद्योगिक आधारभूत संरचना के विस्तार, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया है। उद्योग विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक राज्य को ₹1,21,863 करोड़ के 1,091 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के माध्यम से 68,807 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संवाद कक्ष में उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की उपलब्धियों और भावी योजनाओं की जानकारी दी गई। इस अवसर पर उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक डॉ. विद्यानंद सिंह, एमएसएमई निदेशालय के निदेशक अमन समीर सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। विभाग ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निवेशक-अनुकूल माहौल तैयार करने, औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने और स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल की जा रही हैं।
औद्योगिक भूमि आवंटन में तेजी
उद्योग विभाग के अनुसार, राज्य में 14,600 एकड़ से अधिक नई औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए 25 जिलों में 28 स्थलों पर नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 521 इकाइयों को 727.02 एकड़ भूमि आवंटित की है। विभाग के मुताबिक, इन परियोजनाओं से ₹18,380.25 करोड़ के निवेश और 49,167 रोजगार अवसरों की संभावना है। राज्य में 94 औद्योगिक क्षेत्रों के नेटवर्क के साथ 32 लाख वर्ग फुट से अधिक प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक आधारभूत संरचना भी उपलब्ध कराई गई है।
गया में 1,670 एकड़ की मैन्युफैक्चरिंग सिटी
गया में लगभग 1,670 एकड़ क्षेत्र में बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी विकसित की जा रही है। विभाग के अनुसार, इस परियोजना का शुभारंभ 24 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इससे बड़े विनिर्माण उद्योगों को आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की उम्मीद है।
इसके अलावा मुजफ्फरपुर में 143.96 एकड़ में मेगा फूड पार्क, महिल-मोतीपुर में 62.17 एकड़ में लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर और फतुहा में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। झंझारपुर में मॉडल ग्रीन इंडस्ट्रियल एरिया तथा कुमारबाग और नवानगर में विशेष आर्थिक क्षेत्र से जुड़ी पहलों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

महिल में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर का उद्घाटन 15 अक्टूबर को किया गया। विभाग के अनुसार, इसके अंतर्गत ₹140.95 करोड़ की लागत से विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और कॉमन फैसिलिटी सेंटर का लोकार्पण भी हुआ।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर फोकस
बिहार सरकार ने नई तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सेमीकंडक्टर नीति 2026 के माध्यम से पहल की है। पटना में ₹171 करोड़ के निवेश से 15 एकड़ क्षेत्र में प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के विकास की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। विभाग का मानना है कि इन पहलों से तकनीकी निवेश, विनिर्माण और कौशल विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
एम एस एम ई और स्टार्टअप से स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार में नया एम एस एम ई निदेशालय और बिहार राज्य विपणन प्राधिकरण स्थापित किया गया है। राज्य सरकार ने बिहार एम एस एम ई नीति, 2026, मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना और सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियमावली जैसी पहलें भी शुरू की हैं।
उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत छह उप-योजनाओं में 47,075 लाभार्थियों को ₹3,414 करोड़ से अधिक की सहायता दी गई है। बिहार लघु उद्यमी योजना के अंतर्गत 71,740 लाभार्थियों को ₹581 करोड़ वितरित किए गए हैं।
स्टार्टअप बिहार के तहत 1,762 स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं और ₹103 करोड़ की फंडिंग वितरित की गई है। राज्य में 22 इन्क्यूबेशन सेंटर, 47 स्टार्टअप सेल और तीन बी-हब को-वर्किंग स्पेस स्थापित किए गए हैं।
रोजगार सृजन और कौशल विकास की योजनाएं
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बिहार में 41,155 इकाइयों को स्वीकृति मिलने और ₹1,015 करोड़ की मार्जिन मनी जारी होने की जानकारी विभाग ने दी। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना में बिहार को वर्ष 2026 में ‘Highest Sanction Achiever Category’ और ‘Best State’ का प्रथम पुरस्कार मिलने का भी उल्लेख किया गया।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 1,62,053 कारीगरों का पंजीकरण, 1,20,885 का प्रशिक्षण, 24,615 ऋण वितरण और 77,628 लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। आर ए एम पी कार्यक्रम के अंतर्गत 21,954 उद्यमिता विकास प्रशिक्षण भी पूरे किए गए हैं।
सिंगल विंडो पोर्टल से आसान होंगी औद्योगिक प्रक्रियाएं
निवेशकों की सुविधा के लिए उद्योग विभाग ने संशोधित सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल शुरू किया है। विभाग के अनुसार, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नौ विभागों की 62 सेवाएं उपलब्ध हैं। निवेशक इसके माध्यम से आवश्यक अनुमतियों की पहचान, लाइसेंस के लिए आवेदन और आवेदन की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे।
इसके साथ ही राज्य में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य एवं जिला निर्यात कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत 10 वर्किंग वुमेन हॉस्टल की परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
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उद्योग विभाग ने कहा कि बिहार का लक्ष्य निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना, स्थानीय उद्यमियों को मजबूत करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। हालांकि, घोषित निवेश प्रस्तावों और संभावित रोजगार अवसरों को वास्तविक उपलब्धि में बदलने के लिए परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
