भगत सिंह तेरे विचार आज भी जिन्दा है प्रभुराज नारायण राव

भगत सिंह तेरे विचार आज भी जिन्दा है
प्रभुराज नारायण राव

 

जे टी न्यूज
शहीद ए आज़म भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को लालपुर जिले के बंगा ग्राम में हुआ था। उनकी शिक्षा डी ए वी स्कूल लाहौर में हुई थी। उनके शिक्षक जयचंद विद्या अलंकार तथा भाई परमानंद जी देश की आजादी के संघर्ष और आजादी के बाद देश के अंदर एक समाजवादी व्यवस्था का निर्माण के पक्षधर थे।भगत सिंह के ऊपर अपने दोनों शिक्षकों तथा 1917 कि सोवियत क्रांति का प्रभाव जबरदस्त रूप में पड़ा।वे महात्मा गांधी से भी प्रभावित थे।लेकिन 1921 में गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन को वापस लेने पर आक्रोशित हो गांधी जी से अलग होकर आजादी के बाद देश में एक समाजवादी व्यवस्था कायम करने के संघर्ष को आगे बढ़ाने लगे।1926 में वे भारत नौजवान सभा की स्थापना की ।बाद में चंद्रशेखर आजाद से मिलकर हिंदुस्तान प्रजातांत्रिक सेना में समाजवाद को शामिल कर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातांत्रिक सेना नाम की पार्टी बनाई गई।1928 में लाला लाजपत राय के हत्यारा के मारने के बदले पुलिस ऑफिसर सांडर्स की हत्या कर दी।इसके बाद लाहौर से भगत सिंह को निकालने के क्रम में सरदार वाली बाल कटा कर अंग्रेजी हैट पहन कर मशहूर क्रांतिकारी दुर्गा भाभी के सहारे कलकत्ता चले गये।इस बीच पार्टी के विस्तार के काम में लग गये।
8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ दिल्ली के सेंट्रल एसेंबली में बम फेंका।वह बम आवाज करने के मात्र था।भगत सिंह ने कहा था कि जर्मन का क्रांतिकारी बेला ने कहा था कि बहारों को सुनाने के लिए धमाके की जरुरत पड़ती है।यह बम बहरों को सुनाने के लिए धमाका मात्र था।दूसरा मकसद देश वासियों के अंदर क्रांति का जोश भरना था।उनका मकसद देश को धर्म, जाति और भेदभाव से मुक्त आर्थिक,सामाजिक समानता के लिए एक समाज बनाना था।ताकि गरीबों,किसानों और मजदूरों का शोषण रुक सके।


वे फांसी लगने के पूर्व लेनिन की किताब पढ़ रहे थे।उनके फांसी के समय 24 मार्च 1931 को निर्धारित था।लेकिन भयभीत अंग्रेजों ने 23 मार्च की संध्या में ही आनन फानन में उनके साथ राजगुरु,सुकदेव को भी फांसी दे दिया।

Related Articles

Back to top button