विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी मिले प्राथमिकता : डॉ. मो. रहमतुल्लाह
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर महारानी कल्याणी महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, मानसिक समस्याओं पर खुलकर बात करने और संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर जोर
विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी मिले प्राथमिकता : डॉ. मो. रहमतुल्लाह
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर महारानी कल्याणी महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, मानसिक समस्याओं पर खुलकर बात करने और संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर जोर
जे टी न्यूज/दरभंगा, 10 अक्टूबर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय में मनोविज्ञान विभाग, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रधानाचार्य डॉ. मो. रहमतुल्लाह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव तथा मानसिक समस्याओं के प्रति सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर दिया गया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य डॉ. मो. रहमतुल्लाह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत सुख-शांति का विषय नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर सामाजिक संबंधों और व्यक्तित्व के समग्र विकास की बुनियाद है। विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता के साथ-साथ उनके मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों का दायित्व विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के साथ उनकी भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना भी है।
मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देना जरूरी
महाविद्यालय के बर्सर डॉ. सच्चिदानंद मिश्र ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक जीवनशैली में शैक्षणिक दबाव, भविष्य की चिंता और व्यक्तिगत चुनौतियां युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समस्याओं को गंभीरता से समझने की जरूरत बताई।

सहानुभूति से दूर होगा मानसिक समस्याओं से जुड़ा कलंक
मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष सह एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. रीता कुमारी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य स्वस्थ, सशक्त और संतुलित जीवन का अनिवार्य आधार है। तनाव, चिंता और भावनात्मक कठिनाइयां जीवन का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन इन्हें छिपाना या कमजोरी समझना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि अपनी भावनाओं को समझना, दूसरों की बातों को संवेदनशीलता से सुनना, नियमित दिनचर्या अपनाना और जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श लेना मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तभी सार्थक होगी, जब लोग सहानुभूति को अपने व्यवहार में उतारेंगे और मानसिक समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने का प्रयास करेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल जीवनभर की जिम्मेदारी : डॉ. रंजन कुमार ठाकुर
आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. रंजन कुमार ठाकुर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल केवल एक दिन का प्रयास नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली जिम्मेदारी है। परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज के सामूहिक सहयोग से ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां प्रत्येक व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।
कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ. आलोक प्रभात, खेल प्रभारी डॉ. सुरेश चन्द्र, प्रधान सहायक कन्हाई कुमार चौधरी, सहायक शेखर कुमार चौधरी, सुमन कुमार झा, राकेश कुमार ठाकुर, अविनाश कुमार सिंह सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे l




