सम्मान मांगने से नहीं, दूसरों को सम्मान देने से मिलता है

हमारा व्यवहार ही तय करता है कि लोग हमें प्रेम देंगे या दूरी बनाएंगे : बिमल सर्राफ

सम्मान मांगने से नहीं, दूसरों को सम्मान देने से मिलता है

हमारा व्यवहार ही तय करता है कि लोग हमें प्रेम देंगे या दूरी बनाएंगे : बिमल सर्राफ

जे टी न्यूज, रक्सौल, पूर्वी चंपारण।
मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी खूबसूरती अच्छे रिश्तों में है। धन, पद और प्रतिष्ठा से हम लोगों का ध्यान तो आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन सच्चा प्रेम, सम्मान और सहयोग केवल अपने अच्छे व्यवहार से ही प्राप्त कर सकते हैं। जीवन का एक सरल सत्य है—जो सम्मान हम दूसरों को देते हैं, वही किसी न किसी रूप में लौटकर हमारे पास आता है।

लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई, जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद्, रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी तथा सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने कहा कि संसार परस्पर सहयोग और सद्भाव से चलता है। हर व्यक्ति चाहता है कि लोग उसे प्रेम करें, उसकी बात सुनें और कठिन समय में उसका साथ दें। लेकिन अक्सर हम यह भूल जाते हैं कि दूसरों से ऐसी अपेक्षा करने से पहले हमें स्वयं कैसा व्यवहार करना चाहिए।

रिश्ते शब्दों से नहीं, व्यवहार से बनते हैं। मधुर वाणी, विनम्रता, उदारता और दूसरों की भावनाओं का सम्मान ऐसे गुण हैं, जो अनजान लोगों को भी अपना बना लेते हैं। इसके विपरीत, अहंकार, कटु वचन, स्वार्थ और दूसरों को छोटा समझने की आदत धीरे-धीरे अपने लोगों को भी दूर कर देती है।

हम अक्सर चाहते हैं कि लोग हमारी गलतियों को माफ करें, हमारी भावनाओं को समझें और हमारी परेशानियों में हमारा साथ दें। लेकिन क्या हम भी दूसरों के लिए ऐसा ही करते हैं? क्या हम किसी की बात धैर्य से सुनते हैं? क्या हम दूसरों की सफलता से खुश होते हैं? क्या हम किसी कमजोर व्यक्ति को भी उतना ही सम्मान देते हैं, जितना किसी प्रभावशाली व्यक्ति को? इन सवालों के जवाब ही हमारे व्यक्तित्व की असली पहचान हैं।

 

यह संसार प्रतिध्वनि की तरह है। हम जैसी वाणी बोलते हैं और जैसा व्यवहार करते हैं, वैसी ही प्रतिक्रिया अक्सर हमें मिलती है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर अच्छा व्यवहार करने वाले को हमेशा अच्छा ही प्रत्युत्तर मिलेगा, बल्कि यह कि हमारा आचरण हमारे रिश्तों और जीवन के वातावरण को गहराई से प्रभावित करता है।

इसलिए दूसरों से शिकायत करने से पहले स्वयं के व्यवहार को सुधारना जरूरी है। किसी का अपमान करके सम्मान की उम्मीद करना, कटु वचन बोलकर प्रेम चाहना और केवल अपने स्वार्थ के लिए रिश्ते निभाना उचित नहीं है। सच्चा व्यक्तित्व वह है, जो दूसरों की गरिमा बनाए रखे, गलती होने पर क्षमा मांगे और जरूरत पड़ने पर बिना किसी स्वार्थ के सहायता के लिए आगे आए।

अंततः, सम्मान कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे मांगा या थोपा जा सके; यह हमारे आचरण से अर्जित किया जाता है। यदि हम चाहते हैं कि लोग हमें याद रखें, तो अपने व्यवहार में प्रेम, वाणी में मधुरता और मन में दूसरों के प्रति सम्मान रखें। क्योंकि जीवन में हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि कितने लोग हमसे प्रभावित हैं, बल्कि यह है कि कितने लोग हमारे साथ स्वयं को सम्मानित, सुरक्षित और अपनापन महसूस करते हैं।

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