संत पॉल एकेडमी में बच्चों ने बनाई आकर्षक रंगोली, कलात्मक प्रतिभा ने मोहा मन

धनतेरस, दीपावली और छठ के अवसर पर रंग-बिरंगी रंगोलियों से सजा विद्यालय परिसर; लक्ष्मी माता, दीप जलाती महिला और अल्पना की दिखी मनमोहक झलक

संत पॉल एकेडमी में बच्चों ने बनाई आकर्षक रंगोली, कलात्मक प्रतिभा ने मोहा मन

धनतेरस, दीपावली और छठ के अवसर पर रंग-बिरंगी रंगोलियों से सजा विद्यालय परिसर; लक्ष्मी माता, दीप जलाती महिला और अल्पना की दिखी मनमोहक झलक
जे टी न्यूज,
समस्तीपुर। शहर के विवेक-विहार मोहल्ला स्थित संत पॉल एकेडमी में धनतेरस, दीपावली एवं छठ पर्व के अवसर पर रंगोली निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें स्कूली बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक सोच का शानदार प्रदर्शन करते हुए एक से बढ़कर एक आकर्षक रंगोलियां बनाईं। रंग-बिरंगी कलाकृतियों से पूरा विद्यालय परिसर उत्सवी माहौल में रंग गया।

कार्यक्रम में दसवीं कक्षा की छात्राओं श्रेया राय, माही कुमारी, सुप्रिया कुमारी, सृष्टि झा, अनुभूति प्रिया एवं दामिनी दीक्षित ने मां लक्ष्मी की आकर्षक रंगोली बनाई। वहीं, नौवीं कक्षा की आरोही, स्नेहा, अनीशा, अनुष्का, निहारिका एवं कहकशां ने दीप जलाती महिला की सुंदर आकृति उकेरकर सभी का ध्यान आकर्षित किया। आठवीं कक्षा की वैष्णवी, आर्या, सनम खातून, आरोही एवं अदिति रंजन ने आकर्षक अल्पना बनाई। सातवीं कक्षा की अर्पिता, सोनम, स्मृति, समृद्धि, सिमरन एवं मनीषा ने मां लक्ष्मी की रंगोली तैयार की।

इसी क्रम में छठी कक्षा की सोम्या सुमन, तनुश्री, भूसरा अशरफ, शिवांशी एवं आराध्या राज ने हाथी और कमल की सुंदर आकृति बनाई। वहीं, पांचवीं कक्षा की प्रीति, संध्या, देविका, सृष्टि, विक्टोरिया एवं आराध्या ने दीप जलाती महिला की आकर्षक रंगोली बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य संजय कुमार, शिक्षक प्रवीण कुमार, मनीष कुमार, शिशिर कुमार, अमरनाथ कुमार, दीपू कुमार एवं व्यवस्थापक संतोष कुमार ने कहा कि बच्चों की रंगोलियों में उनकी कलात्मक सोच, कल्पनाशीलता और हुनर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बच्चों ने रंगों के माध्यम से धनतेरस, दीपावली और छठ की खुशियों एवं उमंगों को अभिव्यक्त किया है।

वहीं, शिक्षिका वंदना कुमारी एवं अर्चना शरण ने कहा कि रंगोली भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। इसका उद्देश्य घर-आंगन को सुंदर बनाने के साथ सुख, समृद्धि और खुशहाली का संदेश देना भी है। ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बच्चों की आकर्षक कलाकृतियों को देखकर शिक्षक, अभिभावक एवं अन्य उपस्थित लोग काफी प्रभावित हुए। सभी ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। इस आयोजन ने बच्चों में भारतीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और त्योहारों के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को भी प्रोत्साहित किया

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